हे ऋतुराज वसंत …

हे ऋतुराज वसंत …
कौन दिशा आते हो …
शिशिर के घमंड को तोड़…
किस रंग में हमें रंग जाते हो …
हे ऋतुराज वसंत …
तेरे आने की खबर हमें कौन दे जाता है …
खेतों में लहलहाते सरसों के फूल …
या कोयल की मधुर बोल …
हे ऋतुराज वसंत …
तुम्हारे इंतज़ार में …ठिठुरती धरती भी …
तेरे आगमन से…थोडा इठलाती है …
परागों के यौवन को देख …’प्रकृती’ भौरों में समा जाती है …”

~ RR / #Daalaan / 03.02.2014 / प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र ‘दैनिक भास्कर’ के पटना संस्करण में भी छपा था ।

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