अटल जी की स्मृति में …

अटल जी

आंखें बंद हो गयी होंगी । धड़कने रुक गयी होंगी । पर काल के कपाल पर लिखी हुई स्मृति भला कब बंद होती हैं या रुकती हैं ।
सन 1957 में लोकसभा और उनके भाषण से मंत्रमुग्ध नेहरू जी और वहीं से एक भविष्यवाणी – देश का होने वाला प्रधानमंत्री । कितना ओजस्वी वो भाषण रहा होगा कि महज 30 – 32 के एक नौजवान में देश का तत्कालीन प्रधानमंत्री आने वाले समय का प्रधानमंत्री घोषित करता है । अदभुत ।
नमन है उस मिट्टी को , नमन है उस कोख को । नमन है उस लोकतंत्र को जहां ऐसे नेता को भी पनपने का मौका मिला । नमन है उनके उस व्यक्तित्व को जिसे उन्होंने सर्वमान्य बनाया । व्यक्तित्व में राजनीतिक ओछापन नही था । सन 1977 में मोरारजी भाई के नेतृत्व वाली सरकार में विदेश मंत्री बने । साउथ ब्लॉक के गलियारे से नेहरू जी की तस्वीर हटा ली गयी – वाजपेयी जी को बहुत बुरा लगा और उन्होंने पुनः नेहरू जी की तस्वीर को साऊथ ब्लॉक के गलियारे में लगवाया । व्यक्तित्व में बडपन्नता थी – तभी तो वो जनसंघी होते हुए भी सर्वमान्य थे ।
सर्वमान्य थे तभी तो सन 1992 में कांग्रेस राज में भी उन्हें पद्म विभूषण मिला । यह किसी से खैरात में नही मिली थी – यह एक विपक्षी नेता की अपनी खुद के विशाल व्यक्तित्व की कमाई थी ।
उनके दौर में ही हमारे वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को विकास की राजनीति का पाठ मिला । बतौर प्रधानमंत्री देश को चौड़े सड़कों से बांध देने की कल्पना उनकी ही थी – उनके इस कार्य करने की कला का छाप साफ साफ श्री नीतीश कुमार पर दिखता है ।
गोधरा कांड से दुःखी थे – वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री को ‘ राजधर्म ‘ की सलाह दे दी । आडवाणी बीच मे आ गए वरना ‘राजधर्म’ क्या होता है – देश का प्रधानमंत्री एक मुख्यमंत्री को बताने को तैयार बैठा था ।
कंधार घटना उनके काल मे हुई लेकिन यह सर्वविदित है कि इस घटना में भी वो मजबूर किये गए थे । कारगिल को जीत उन्होंने पाकिस्तान को अपने तेज व्यक्तित्व का परिचय दिया । पोखरण में परमाणु विस्फ़ोट कर विश्व को फिर से चकित भी किया ।
देश किस दिशा में घूम रहा है – वाजपेयी जी वर्षों पहले मौन हुए और मौन ही निकल गए ।
राजनीति कोई भी कर सकता है लेकिन नेतृत्व एक विशाल व्यक्तित्व ही करता है – वो घर हो , मुहल्ला हो , गाँव हो या राज्य – देश । नेतृत्व किसी पद की मोहताज नही होती और मुझे यह निश्चित पता है कि अश्रुपूर्ण जनता उन्हें एक प्रधानमंत्री पद से भी ऊंचे पद के रूप में स्वीकारी है ।
अलविदा । राष्ट्र हमेशा आपका ऋणी रहेगा ।
~ रंजन ऋतुराज / 16.08.2018

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