नवरात्र ~ २ , २०२०

~ अभी अभी दो चार दिनों पहले की बात है , हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के एक लेख में यह लिखा था कि अगर आप खुद को कमज़ोर महसूस कर रहे हैं , या डिप्रेशन में हैं या लो हैं फिर एक ऐसे मित्र की तलाश कीजिए जो आपके पूर्व में आपके बेहतरीन दिनों की याद करवाए ।
कहने का मतलब की शब्दों की ताकत । कल्पना कीजिए कि आपका कोई मित्र आपके लिए बढ़िया शब्द बोले , मन एकदम से प्रफुल्लित हो जाता है :))
अगर मेरे इर्द गिर्द कोई नहीं होता तो मै खुद के लिए ऐसे वातावरण तैयार कर लेता हूं । लेकिन यह एक आदत है – सामने वाले की खूबी को देखना और बोलना । बचपन का मेरा एक मित्र है , एकदम जान देने वाला दोस्ती । जब हमारी दोस्ती हुई थी , उस वक़्त उसके परिवार की वित्तीय स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी लेकिन कालान्तर उसने बहुत पैसा कमाया । टीनएज में कम बुद्धि सो मैंने कुछ गलत शब्द इस्तेमाल कर दिए थे । आज तीस साल बाद भी उसको मेरे नकरात्मक शब्द याद है । कभी कभी वो चर्चा में उस बात को याद कर देता है और मै शर्मिन्दा हो जाता हूं । बात कुछ नहीं थी – मैंने उसे कुत्ता कह दिया था । हा हा हा । लेकिन यह बात उसे चुभ गई । ऐसा मेरे साथ भी हुआ है , मेरे एक सबसे अजीज ने बातों बातों मुझे बौना / बोनसाई पेड़ / सूखा हुआ पेड़ कह दिया क्योंकि मेरे व्यक्तित्व का सिर्फ एक पक्ष उन्हें नजर आया और उस दौरान वो दो अन्य नए मित्रों के लगातार संपर्क में थे । यह बात बुरी तरह चुभ गई । इस कदर चुभी की मै बहुत छटपटा कर , कुछ महीनों बाद खुद को अलग कर लिए । और कोई चारा नहीं था ।
साकारात्मक शब्द लोग भूल जाते हैं लेकिन आपके नकरात्मक शब्द लोगों को याद रहता है । अब मेरी उम्र के लोग जो जीवन के हर एक रंग को लगभग देख चुके हैं , जीवन के पहलू को समझ चुके हैं , ऊंच नीच देख चुके हैं – फिर क्यों तौलना ? अगर सामने वाला आपको तौल दिया तो ? तराजू तो सबके पास होती है , न ।
खैर , हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के उस लेख में यही था कि आस पास बढ़िया मित्र रखिए जो आपके लिए बढ़िया शब्द बोले । कल एक मित्र से करीब 20 साल बाद मिला , बातों बातों में उसने कह दिया – अब हमारी जिन्दगी में वक्त ही कितना रह गया है कि नया एक्सपेरिमेंट करें । बात उसने सही कही लेकिन थोड़ी नकरात्मक थी । पूरी रात बोझिल रहा ।
सीता गीता , राम श्याम इत्यादि सिनेमा देखें होंगे । कैसे शब्दों की चोट से इंसान को बंधुआ की तरह रखा जाता है । दुर्भाग्य देखिए समाज का , ऐसे नकरात्मक शब्द आपके सबसे अजीज द्वारा ही बोले जाते हैं या फिर साइकोलॉजी है कि उनके ही शब्द आपको चोट पहुंचाते हैं ।
नकरात्मक छूत की बीमारी है । कोरोना से भी खतरनाक । नकारात्मकता से गुजर रहे किसी इंसान से दो मिनट गप्प कर लीजिए , यह नकारात्मकता आपको घेर लेगी । इसकी अपनी ही एक ख़ास शक्ति है । इससे बचने के लिए खुद के मन के इम्यून सिस्टम को मजबूत करना होता है ।
खैर … आज रविवार का दिन । धूप खिली हुई है । बेटा बोल दिया कि आपका ग्रामर का सिर पैर का कुछ पता ही नहीं चलता 😐 आज से रेन और मार्टिन शुरू 😂 कभी कभी टोकना भी बढ़िया होता है :)) शब्दों का प्रभाव ❤️
नवरात्र की ढेरों शुभकामनाएं …
: रंजन , दालान

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