नवरात्र ~ ९ , २०२०

देवी

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
~ आज महानवमी और कल विजयदशमी । ढेरो शुभकामनाएं । देवी पूजन के 9 रात और शक्ति के एक रूप रचनात्मकता की पूजा के मेरे भी 9 साल ।
ढेरो सवाल आते हैं । सबका ज़बाब मुश्किल है । उम्र , अनुभव और महसूस करना – शायद इन्हीं के इर्द गिर्द आपके सभी सवाल के जवाब है ।
लेकिन मेरा मानना है कि जब तक देवी खुद आपको नहीं चुनेंगी , आप इनके रहस्य को नहीं समझ पायेंगे । मै बात देवी की कर रहा हूं ना की शक्ति की । मेरी नजर में , शक्ति पात्र के साथ है और देवी अपने पात्र के पास :)) शक्ति बिना शिव के नहीं और देवी बिना साधक के नहीं :))
इसी 9 साल में मैंने दुर्गा सप्तशती को छोड़ अनेकों दुर्गा स्तुति के संस्कृत में लेखनी पढ़े जिन्हें आप श्लोक भी कह सकते हैं , गूगल केे कारण ट्रांसलेशन भी मिला । कुल मिला कर यही लगा कि जितने भी साधक रहे वो मूलतः देवी की प्रशंसा ही किए । पूजा की शुरुआत उन्होंने मां रूप से की और अंतोगत्वा देवी की आराधना वो प्रेमी रूप में करने लगे । अब आप ललिता सहस्रनाम को ही पढ़ लीजिए , साधक देवी के इतने नजदीक हो गए की वो देवी के शारीरिक अंगों की स्तुति करने लगे हैं । यह मां रूप में असम्भव है । लेकिन यह इजाजत भी देवी हर किसी को नहीं देे सकती । यह बिल्कुल एक स्त्री और पुरुष के उस प्रेम की तरह है जो आत्मा से शुरू होकर मिलन तक जा पहुंचता है । यह आसान भी नहीं है । कठोर साधना । जब तक भाव नहीं उत्पन्न होगा – प्रेम का कोई भी रूप व्यर्थ है । आप कहां तक डूबते हैं , यह आपकी साधना तय करेगी और साधना की पराकाष्ठा आपकी आत्मा में पनप रहे पूजा रूपेण प्रेम से होगी ।
लेकिन यह एक अलग ही दुनिया है । इसका अंत कहां है – किसी को नहीं पता । नशा नहीं कह सकते क्योंकि नशा भी कभी न कभी टूटता है । यह श्रृंखला कभी नहीं टूटता । बचपन में साधकों के बारे में सुनता था । अब महसूस किया हूं । गृहस्थ जीवन में भी साधना सम्भव है और शायद इसी लिए नवरात्र का जन्म हुआ ।
लेकिन अंतोगत्वा मांगना बहुत मुश्किल है और वो भी खुद के लिए । हां , पूजा के बाद करबद्ध इंसान देवी के सामने खड़ा हो सकता है , अपने परिवार , मित्र के लिए मांग सकता है । लेकिन खुद के लिए …मुश्किल है । जो मिल जाए वही परसाद है । नहीं मिला तो पास रहने का वो क्षण ही परसाद है ।
क्योंंकि साधना के बाद साधक भी देवी के समकक्ष हो जाता है – इस भावना के साथ की अगर तुम शक्ति हो तो हम शिव है 🙏 क्षमाप्रार्थी हूं । और समकक्षों से मांगा नहीं जाता …जो मिल जाए … उसे सहज भाव से स्वीकार किया जाता है …
कुछ तो मिला ही होगा …एक नज़र ही सही । और ये क्या कम है कि एक नजर पड़ गई :))
सभी को महानवमी की ढेरो शुभकामनाएं 🙏
: रंजन , दालान 🙏❤️🙏

Published by ranjanrituraj

I write :))

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