छठ : जब ले माई बिया …

आज नहाय – खाय है ! हल्का ठण्ड ! कुहासा भी है ! कम्बल से बाहर निकला तो देखा – दरवाजे पर हुजूम ! बाबा का खादी वाला शाल ओढ़ – चाचा का हवाई चप्पल ले के …बाहर ! कुर्सियां सजी है – लोग बैठे हैं !
अहा …मिंटू चाचा …एक कुर्सी पर चुप चाप ! सीधे जा कर उनको ‘गोर’ छू कर प्रणाम – चाचा …आपका बाल सफ़ेद हो गया …हंसने लगे – बोले ….तुमको गोद में खिलाया – अब जब तुम चालीस ‘टप’ गए – फिर हमारी क्या अवकात !
दरवाजा पर सब लोग हंसने लगे ! बड़ा ही मनोरम दृश्य !
‘मिंटू’ चाचा – सब याद है ! कुछ पढ़ लिख ‘हैदराबाद’ चले गए ! घर के सबसे बड़े लडके ! पिछले तीस साल से हर साल – छठ पूजा में गाँव आना ! अजब ढंग है – सुबह सुबह चार बजे ही – गाँव में घुस जाते हैं – लोग कहता है – गाँव में घुसते वक़्त – अपना जूता खोल देते हैं – पिछला साल हम पूछे – ऐसा क्यों चाचा ? बोले – इ मंदिर ह ( यह मंदिर है ) – बाप दादा का जगह है ! कभी कोई मुझे खोदेगा – तब मेरा जड़ यहीं मिलेगा ! जड़ है ..तभी हम और तुम हैं !
मिंटू चाचा चार्टेड प्लेन से चलते हैं – गाँव में किसी को नहीं पता – बताना भी नहीं चाहते – हैदराबाद में पचास करोड़ का अपना बंगला है ! गाँव आने पर – वही हाफ कुरता – पायजामा ! हम पूछे – कब तक गाँव आईयेगा – एक दिन छुट जायेगा ..सब ! उनका आँख भर गया – कहने लगे – ‘जब ले माई बिया’ ( जब तक माँ जिन्दा है ) !
तब तक एक नौजवान जेन्स और टी में – मिंटू चाचा का बेटा – अमरीका में डाक्टर – अँगरेज़ पत्नी ! आँख निचे – हाथ पीछे ! मिंटू चाचा ..भावुक हो गए ..अपना स्ट्रगल का कहानी सुनाने लगे – पढ़ते वक़्त – गाँव का कौन कौन मदद किया – कैसे किया….उनका बेटा ..चुप चाप …आँख निचे किये …सुन रहा है .. ! बेचारा उनका बेटा – एक तरफ से दरवाजे पर सभी लोग को – गोर छू छू के प्रणाम – मिंटू चाचा सभी से – आशीर्वाद दीं – इहे एगो बारन ! ( आशीर्वाद दीजिये – यहीं एक हैं मेरे सुपुत्र ) !
मिंटू चाचा बोले – चलो मेरे अंगना – चाची से मिल लो – उनका घर मेरे घर से सौ गज दूर – रास्ता में बोले – किसको दिखाएँ और क्या दिखाएँ – परस्पर श्रद्धा ख़त्म हो जायेगा – जो क़र्ज़ माथे पर है – किस धन से चुकाएं ….आँगन में चाची …मचिया पर …हंसी मजाक …स्टील के कप में… एक कप चाय ..मिला ..निमकी के साथ !
बाहर निकल – मिंटू चाचा से – हम पूछे – कब तक गाँव आईयेगा – एक दिन छुट जायेगा ..सब ! उनका आँख भर गया – कहने लगे – ‘जब ले माई बिया’ ( जब तक माँ जिन्दा है ) !
~ 16 November – 2012 / DAALAAN

Published by ranjanrituraj

I write :))

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