अंचार….

आपके डाइनिंग टेबल या आपके भोजन पर बेहतरीन अंचार अवश्य होना चाहिए । अब खाना बढ़िया नहीं बना है , यह कहने का हिम्मत बहुत कम लोगों को होता है तो उसकी भरपाई वह अंचार करता है 😝
दस बजिया स्कूल में पढ़े है । मतलब सुबह दस से शाम चार वाला । टिफिन ले जाना थोड़ा शान के खिलाफ भी होता था सो 4 बजे घर लौटते ही – सब्जी खत्म – दाल खत्म इत्यादि इत्यादि फिर दिन का बचा हुआ चावल और बोईआम से निकला हुआ बड़का आम के फांक वाला अंचार और उसका मसाला । भात में सान दीजिए और भर दम खा लीजिए 😎 उसके बाद क्रिकेट / फुटबॉल / लट्टू – जो मन करे ।
अंचार को लेकर थोड़ा सेंसिटिव हूं । दिन के प्रथम भोजन में बिल्कुल नहीं चाहिए लेकिन बाकी के सभी भोजन में चाहिए ही चाहिए टाइप ।
तरह तरह का अंचार देखा , जाना और चखा लेकिन मेरे इलाके में मुख्यत आम का , मिर्च का , कभी कभी कटहल का , भोज में आलू का भी । करौंदा का भी – कभी कभार थोड़ा महिन परिवार के भौजाई के यहां या फिर जो दक्षिण भारत ट्रैवल कर के आया हो तो – तनी टेस्ट कीजिए न रंजू बाबू , हैदराबाद से लाए हैं टाइप 😝
अंचार बहुत शुद्धता से बनाया जाता है । बचपन में देखते थे – आम आया , फंहसूल से कटाया , मसाला तैयार हुआ , तेल पेराया , बड़का बड़का सीसा वाला बॉईआम साफ हुआ । आम सुखाया गया , उसके फांक में मसाला डाला गया – सरसों के तेल में सम्पूर्ण स्नान इत्यादि के साथ उसको धूप दिखाया गया । फिर उसको सीसा के मर्तबान में रखा गया । जिस आम के अंचार से टप टप तेल नहीं टपका – मतलब कहीं कुछ कंजूसी हुआ है 😐
खैर , हमको भी अंचार बनाने आता है 😝 हॉर्लिक्स का एक सीसी ले लीजिए । उसको सर्फ के घोल से साफ कर के धूप में सूखा दीजिए । आधा किलो हरा मिर्च खरीद के लाइए । हर एक मिर्च का पेट काट दीजिए । फिर उसको हॉर्लिक्स वाले सीसी में रख कर छह नींबू का रस उसमे डाल दीजिए और थोड़ा अदरक का महिन पिस । स्वादानुसार नमक और अगर घर में आम का अंचार या भरवां मिर्च का अंचार बन रहा हो तो उसका मसाला इस हरे मिर्च वाले में डाल दीजिए । थोड़ा दो चार दिन धूप दिखा दीजिए ।
फिर जब गैर खून नजदीकी संबंधी ने बढ़िया स्वादिष्ट खाना नहीं बनाया हो फिर इस आपके हरे मिर्च वाले अंचार को भोजन के साथ लेे । ना शिकायत होगी और ना ही भूखे पेट एक दूसरे के कूल खानदान और सभ्यता पर कोई श्लोक बाजी 😝
दिन सुखमय रहेगा 😐
~ रंजन / दालान / 25.05.20

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