घड़ी ….

बहुत दिनों तक हाथ में घड़ी पहन सोने की आदत बनी रही – इस बीच कई बार घड़ी स्लो हो जाती और देर से नींद खुलती – बहुत अफ़सोस और कुछ खोया खोया सा महसूस होता था – अब इस ग्लानी से ऊपर उठ चूका हूँ – लगता है – पाया ही क्या हूँ जोContinue reading “घड़ी ….”

हाफ पैंट

हाफ पैंट भी गजब का ड्रेस है – हम जैसे छोटे शहर से आये लोग इसको पहनते ही ‘फुल्ल कॉन्फिडेंस’ में आ जाते हैं ! कार भी स्टाईल से चलाने लगते हैं – क्या कहें ..हम ! आज कल ठेहुना तक वाला फैशन में है – यूनी सेक्स – दस पॉकेट तो होगा ही !Continue reading “हाफ पैंट”

सोशल मीडिया के लोग ….

लाईकबाज , कमेंटबाज़ , शेयरबाज़ और पोस्टबाज़ :इस फेसबुक पर तरह तरह का आइटम लोग नज़र आता है , कुछ लोग लाईकबाज होता है । आप कुछ भी पोस्ट कीजिये , भाई जी का लाईक जरूर से रहेगा । आप सड़ा अंडा , टमाटर , कद्दू कुछ भी लिख दीजिये , भाईजी का एक लाईकContinue reading “सोशल मीडिया के लोग ….”

दालान लिट्रेचर फेस्टिवल की कहानी

अंजू की गुड़िया : एक कहानीगर्मियाँ आते ही, मैं और मेरे तमाम, हमउम्र भाई-बहन, टाइमपास के नये-नये तरीके ढूँढते ! उन्ही में से एक खेल होता गुड्डे-गुड़िया का ! सिर्फ़ एक घर नही, पूरा मोहल्ला ही बरामदे में बसा लेते हम ! जो बरामदे से निकलता, हाँक देता- “हटाओ ये टीम-टाम!” ! गर्मी की उनContinue reading “दालान लिट्रेचर फेस्टिवल की कहानी”

ख्याल …

एक भोर से देर रात तक में – न जाने कितने ख़याल आते हैं – अलग अलग रंग की भावनाओं में रंगे हुए – तेज़ प्रवाह वाली नदी की तरह , छप्पर उड़ा देने वाली आँधी की तरह । ये ख़याल आते हैं और चले जाते हैं । मन के पटल पर कुछ निशान छोड़Continue reading “ख्याल …”

गुलज़ार …

Gulzar – Happy BirthDay Sir 🙂 ‘खट्टी मीठी आँखों की रसीली बोलियाँबोलिए सुरीली बोलियाँ ‘ गृहप्रवेश का यह गीत एक तड़के सुबह से आँखों में गूंज रहा है ! जब आप आगे लिखते हैं – ‘रात में घोले चाँद की मिश्री – दिन के गम नमकीन लगते है – नमकीन आँखों की नशीली बोलियाँ’ !बसContinue reading “गुलज़ार …”

अटल जी की स्मृति में …

आंखें बंद हो गयी होंगी । धड़कने रुक गयी होंगी । पर काल के कपाल पर लिखी हुई स्मृति भला कब बंद होती हैं या रुकती हैं ।सन 1957 में लोकसभा और उनके भाषण से मंत्रमुग्ध नेहरू जी और वहीं से एक भविष्यवाणी – देश का होने वाला प्रधानमंत्री । कितना ओजस्वी वो भाषण रहाContinue reading “अटल जी की स्मृति में …”

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

पिछले कुछ साल में – इंटरनेट के माध्यम से हज़ारों लोगों के बात चीत और उनके मनस्थिती को समझते हुए यही पाया हूँ की – देश या इस देश के इंसान अभी भी व्यक्तिवाद के पीछे पागल है ! मेरी यहाँ पर दूसरी राय है !मैंने हमेशा संस्था को महत्वपूर्ण समझा है ! उस संस्थाContinue reading “स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं”

छाता …

आइये मेरे पटना में – बारिशों का मौसम है ..:)) जबरदस्त बारिश हो रही है – मेरे पटना में …छाता ….पहले लकड़ी वाला छाता होता था …जैसा छाता वैसा उस इंसान का हैसियत …कलकत्ता से छाता आता था …एक फेमस ब्रांड होता था …नाम भूल रहा हूँ …स्प्रिंग एकदम हार्ड …सब अजिन कजिन उस छाताContinue reading “छाता …”

सुना है ….

सुना है …वो मेरे दालान पर आती है …चुपके चुपके …देर चाँदनी रात …लम्बे घूँघट में झुकी नज़रों के साथ …सावन की बूँदों सी पायल की रुनझुन के साथ …दबे पाँव आधी रात …:))कुछ पढ़ कर …कुछ सुन कर …खिड़कियों को खटखटा कर …वो वापस चली जाती है …चुपके चुपके…देर चाँदनी रात …लम्बे घूँघट मेंContinue reading “सुना है ….”

कहानी साइकिल की …

कहानी साइकिल की : ब्रांड रेलेे 😊कोई राजा हो या रंक – हमारे समाज में उसकी पहली सवारी साइकिल ही होती है और साइकिल के प्रति उसका प्रेम आजीवन रहता है – भले ही वो चढ़े या नहीं चढ़े ।अगर आप अपने बचपन को याद करें तो बड़े बुजुर्ग ब्रांड रेलेे की बात करते थेContinue reading “कहानी साइकिल की …”

प्रेम का आधार …

शायद मैंने पहले भी लिखा था और फिर से लिख रहा हूँ ! प्रेम का आधार क्या है ? मै ‘आकर्षण’ की बात नहीं कर रहा ! मै विशुद्ध प्रेम की बात कर रहा हूँ ! मेरी नज़र में प्रेम का दो आधार है – ‘खून और अपनापन’ ! बाकी सभी आधार पल भर केContinue reading “प्रेम का आधार …”

कहानी साबुन की …

इस छोटे से जीवन में तरह तरह का साबुन देखा और लगाया लेकिन आज भी गर्मी के दिनों में खस और जाड़ा में पियर्स का कोई जोड़ नहीं है ।बाबा को लक्स लगाते देखते थे । दे लक्स …दे लक्स । ढेला जैसा लेकिन सुगंधित । किसी पर चला दीजिए तो कपार फुट जाए ।Continue reading “कहानी साबुन की …”

कुछ यूं ही …

मेरे गाँव के पास से एक छोटी रेलवे लाईन गुजरती है – हर दो चार घंटे में एक गाड़ी इधर या उधर से – पहले भाप इंजन – छुक छुक …लेकिन अब डीजल इंजन है ..भोम्पू देता है ..बचपन में छुक छुक गाड़ी को देखने के बहाने रेलवे ट्रैक के पास जाते थे ..वहाँ ..पटरीContinue reading “कुछ यूं ही …”

प्रेम और प्रकृति …एक कहानी

मुहब्बत सुब(ह) का इक सितारा है ..’ – ये सीरियल देखना ! पाकिस्तानी है ! बहुत संजीदा है ! तुमको पसंद आएगी !क्यों ..मुझे ही क्यों पसंद आएगी ?अरे …तुम थोडा हट के हो ! तुम्हारी हर पसंद कुछ अलग है !पर ..मै टीवी नहीं देखता !मेरे लिए देख लेना ..मै युटिउब का लिंक भेजContinue reading “प्रेम और प्रकृति …एक कहानी”

कुछ यूं ही … कोरोना के बहाने

एक अच्छे कॉलेज में पढ़ाने का फल यह हुआ कि में बहुत ही कम उम्र में अपने विषय का हेड एग्जामिनर बन गया । पूरे यूपी के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज के उक्त विषय कि कॉपियां मुझे मिली और कई साल यह काम करने का मौका मिला । जहां कहीं भी सेंटर होता था – वहांContinue reading “कुछ यूं ही … कोरोना के बहाने”

यादें – 07

Yadein ~ 07 बात 14 अगस्त 2006 की है । 2005 में डबल प्रोमोशन के साथ सहायक प्राध्यापक बन चुके थे , घर बुक हो गया था और चमचमाती नई कार दरवाजे खड़ी थी । पैसों को लेकर थोड़ी तंगी थी । सो छुट्टियों के दिन किसी अन्य विश्वविद्यालय में एक्स्ट्रा क्लास लेने लगा थाContinue reading “यादें – 07”

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट – पार्ट 2

बात पंद्रह साल पुरानी है ! मै नॉएडा आ चूका था ! शिक्षक बन चूका था ! तब हमारे हेड होते थे – कर्नल गुरुराज ! देश के सबसे बेहतरीन रीजनल कॉलेज ‘त्रिची’ से पास ! छोटा कद और बेहद कड़क ! तब वो कॉलेज के वाईस प्रिंसिपल भी थे ! जिस दिन ज्वाइन करनाContinue reading “प्रोजेक्ट मैनेजमेंट – पार्ट 2”

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट – पार्ट 1

ठीक पंद्रह साल पहले की बात है ! इसी जून के महीने एक शाम प्रमोद महाजन दिल्ली एअरपोर्ट पर ए पी जे अब्दुल कलाम का हाथ पकडे बाहर की तरफ निकल रहे थे ! भावी राष्ट्रपति की घोषणा होने वाली थी ! मुर्ख मिडिया ने अब्दुल कलाम साहब पर सवालों के गोले दागने शुरू करContinue reading “प्रोजेक्ट मैनेजमेंट – पार्ट 1”

मेरा गांव – मेरा देस – मेरा मैट्रिक परीक्षा

मार्च के महिना में ‘मैट्रीक’ का परीक्षा होता है – शायद इस पोस्ट को आपमे से बहुत सारे पढ़े होंगे – फिर से पढ़ लीजिये – जो नहीं पढ़ें हैं – आराम से पढ़िए – खालिस बिहारी है …. :)) बिहार में छठ पूजा के बाद – सबसे महत्वपूर्ण पर्व त्यौहार होता है – घरContinue reading “मेरा गांव – मेरा देस – मेरा मैट्रिक परीक्षा”

मेरा देस – मेरा गांव – होली पार्ट २

सुबह सुबह किसी ने पूछ दिया – इंदिरापुरम में आप लोग होली कैसे मनाते हैं ? अब हम क्या बोलें – कुछ नहीं – सुबह से पत्नी – दही बड़ा , मलपुआ , मीट और पुलाव बनाती हैं ! दिन भर खाते हैं – ग्यारह बजे अपने फ़्लैट से नीचे उतर कुछ लोगों को रंगContinue reading “मेरा देस – मेरा गांव – होली पार्ट २”

मेरा गांव – मेरा देस – मेरा होली

छठ / होली में जो अपने गाँव – घर नहीं गया – वो अब ‘पूर्वी / बिहारी’ नहीं रहा ! मुजफ्फरपुर / पटना में रहते थे तो हम लोग भी अपने गाँव जाते थे – बस से , फिर जीप से , फिर कार से ! जैसे जैसे सुख सुविधा बढ़ने लगा – गाँव जानाContinue reading “मेरा गांव – मेरा देस – मेरा होली”

प्रेम और विशालता

प्रेम और विशालता :दिनकर लिखते हैं – “नर के भीतर एक और नर है जिससे मिलने को एक नारी आतुर रहती है – नारी के भीतर एक और नारी है – जिससे मिलने को एक नर बेचैन रहता है ” ..:))और यहीं से शुरू होती है …प्रेम और विशालता की कहानी ! ना तो आकर्षणContinue reading “प्रेम और विशालता”

स्त्री – पुरुष / अर्धनारीश्वर

स्त्री – पुरुष / अर्धनारीश्वर आज महाशिवरात्रि है ! स्त्री पुरुष के बीच के संबंधों को समझने का एक अध्यात्मिक कोण ! किसी भी चीज को समझने का अलग अलग कोण है ! अब आप अपने सुविधानुसार या किसी कारणवश किसी भी चीज को अपने कोण से देखते हैं और आपको प्रकृति भी आपको अपनेContinue reading “स्त्री – पुरुष / अर्धनारीश्वर”

गुलज़ार से मुलाकात : छह साल पहले …2014 में

कल्पनाओं के शिखर पर एक अबोध तमन्ना बैठी होती है – उसकी अबोधता को देख ईश्वर उसे अपने गोद में बैठाते हैं – फिर वो तमन्ना एक दिन हकीकत बन बैठती है…:)) आज का दिन बेहतरीन रहा – कल देर रात तक जागने के बाद – सुबह नींद ही खुली ‘रविश’ की आवाज़ से –Continue reading “गुलज़ार से मुलाकात : छह साल पहले …2014 में”