छोटे व्यापार और मिडिल क्लास

नया नया नोएडा गया था तो सोसायटी के गेट पर ही एक सब्जी विक्रेता थे । पटना के ही थे सो उन्ही के यहां से सब्जी आता था । सुबह सुबह वो अपना दुकान लगा लेते । सेक्टर 62 नोएडा के सोसायटी पब्लिक सेक्टर कंपनी के थे । मदर डेयरी का बूथ नहीं आया थाContinue reading “छोटे व्यापार और मिडिल क्लास”

वसंत पंचमी और सरस्वती

वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की शुभकामनाएं …!!! शिशिर का भाई हेमंत अभी भी उत्तर भारत में अपने पैरों को जमाए खड़ा है और ऋतुराज वसंत भी चौखट पर है । कहने का मतलब की ठंड है ।यह तस्वीर 1650 की मेवाड़ स्टाइल पेंटिंग है । मैंने इधर करीब 5 सालों में लाखों अलग अलगContinue reading “वसंत पंचमी और सरस्वती”

अभिभावक होना …

इस जीवन में कई मुश्किल काम करने होते हैं – उन्ही में से एक है – ‘पैरेंटिंग’ ! अब इस उम्र में जब बच्चे टीनएजर हो चुके हैं – इसका दबाब महसूस होता है ! हर एक पीढी अपने हिसाब से – अपने दौर की नज़र से – अपनी बेसिक क्लास की समझ से ‘पैरेंटिंग’Continue reading “अभिभावक होना …”

जब तुम ताज को देखकर …

तब जब तुम ताज को देख कर झूम जाओगी …उम्र के उस मोड़ पर .अपनी सफेद बालों और बेहतरीन पाशमिना के साथ ….उम्र के उस मोड़ पर .एयरपोर्ट से उसी तेज चाल से निकलते हुए ….मुझे देख मुस्कुरा बैठोगी ….टैक्सी लाए हो या खुद ड्राइव करोगे …थोड़ी तंग …थोड़ी परेशान …मुझसे हमेशा कि तरह बेझिजकContinue reading “जब तुम ताज को देखकर …”

ज़िन्दगी के पन्ने

हर ज़िंदगी एक कहानी है ! पर कोई कहानी पूर्ण नहीं है ! हर कहानी के कुछ पन्ने गायब हैं ! हर एक इंसान को हक़ है, वो अपने ज़िंदगी के उन पन्नों को फिर से नहीं पढ़े या पढाए, उनको हमेशा के लिए गायब कर देना ही – कहानी को सुन्दर बनाता है !Continue reading “ज़िन्दगी के पन्ने”

प्रेम और युद्ध

दिनकर लिखते हैं – ” समस्या युद्ध की हो अथवा प्रेम की, कठिनाइयाँ सर्वत्र समान हैं। ” – दोनों में बहुत साहस चाहिए होता है ! हवा में तलवार भांजना ‘युद्ध’ नहीं होता और ना ही कविता लिख सन्देश भेजना प्रेम होता है ! युद्ध और प्रेम दोनों की भावनात्मक इंटेंसिटी एक ही है !Continue reading “प्रेम और युद्ध”

प्रकृति , धरा और ऋतुराज

धरा – सखी , ये किसकी आहट है ?प्रकृति – ये वसंत की आहट लगती है ..धरा – कौन वसंत ? हेमंत का भाई ऋतुराज वसंत ?प्रकृती – हाँ , वही तुम्हारा ऋतुराज वसंत …:))धरा – और ये शिशिर ?प्रकृति – वो अब जाने वाला है …धरा – सुनो , मैं कैसी दिख रही हूँContinue reading “प्रकृति , धरा और ऋतुराज”