शब्द छवि बनाते हैं …

मै कोई साहित्यकार / लेखक / पत्रकार / कवी / शायर नहीं हूँ – बस जो जब दिल में आया लिख दिया – करीब ठीक दस साल पहले – मैंने यूँ ही रोमन लिपि में हिंदी भाषा में – रामेश्वर सिंह कश्यप उर्फ़ लोहा सिंह से प्रेरित होते हुए – खुद पर ही एक बेहतरीनContinue reading “शब्द छवि बनाते हैं …”

पोंच …

जाड़ा आ ही गया ! मेरे बिहार में जाड़ा के आते आते ही आपको गली – गली में हर चार कदम पर ‘अंडा’ का दूकान मिल जाएगा । – चार वर्ष का बच्चा से लेकर सत्तर साल के बुढा तक दुकानदार मिल जाएगा – इसी उम्र का खाने वाला भी ! एक ठेला पर सजाContinue reading “पोंच …”