छठ क्या है ?

छठ क्या है ? छठ यही है 🙏~ किसी भी बिहारी के लिए यह समझा पाना की छठ क्या है । दुनिया का सबसे मुश्किल काम । जाति को कौन पूछे – धर्म की दीवारें गिर जाती है ।~ भावनाओं का वह सागर किस तूफान पर होता होगा जब गांव के नथुनी मियां कहते हैंContinue reading “छठ क्या है ?”

छठ : जब ले माई बिया …

आज नहाय – खाय है ! हल्का ठण्ड ! कुहासा भी है ! कम्बल से बाहर निकला तो देखा – दरवाजे पर हुजूम ! बाबा का खादी वाला शाल ओढ़ – चाचा का हवाई चप्पल ले के …बाहर ! कुर्सियां सजी है – लोग बैठे हैं !अहा …मिंटू चाचा …एक कुर्सी पर चुप चाप !Continue reading “छठ : जब ले माई बिया …”

छठ की यादें : रंजन ऋतुराज

कल से ही अखबार में ‘छठ पूजा’ को लेकर हो रही तैयारी के बारे में समाचार आने लगे ! आज तो दिल्ली वाला ‘हिंदुस्तान दैनिक’ फूल एक पेज लिखा है ! कल दोपहर बाद देखा – फेसबुक पर् शैलेन्द्र सर ने एक गीत अपने वाल पर् लगाया था – शारदा सिन्हा जी का ! गीतContinue reading “छठ की यादें : रंजन ऋतुराज”

रवीश कुमार की यादों में छठ

रविश कुमार शौक से पत्रकार है – मेरे पड़ोसी से मेरा ही परिचय देने लगे – “हम यादों में जीते हैं” – आज के ‘प्रभात खबर’ के पहले पन्ने पर छपी – उनकी बेहतरीन लेख – छठ पूजा पर – “सामूहिकता सिखाते छठ घाट”‘नरियलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुग्गा मेड़राए, ऊ जे खबरीContinue reading “रवीश कुमार की यादों में छठ”

छठ पर गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा जी का एक लेख …

अक्सर पिछले छह दशकों की वीथियों में घूम ही आती हूं। उन स्मृतियों में सब हैं, दादा-दादी, मां-पिताजी, भाई-बहन और ढेर सारे चाचा-चाचियां और सेवक-सेविकाएं। उन्हीं रिश्तों के बीच होली-दिवाली, दुर्गा पूजा, चौथचंदा, सरस्वती पूजा और व्रत-त्योहार। सबसे ऊपर रहती है छठ पर्व की स्मृति। कितना सुहाना, कितनी आस्था। दादी द्वारा कितने सारे निषेध। चारContinue reading “छठ पर गोवा की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा जी का एक लेख …”