हिन्दी दिवस …

आज हिंदी दिवस है - बचपन में ईकार को लेकर बड़ी मार पडी है - शब्दों के स्त्री लिंग / पुलिंग को भी लेकर - बताईये तो महाराज - एक बच्चा क्या क्या समझे 😦 ? ये बात हम पूछते भी तो किससे पूछते 😦 जिससे पूछते - वही दो चटकन देने को तैयार रहता … Continue reading हिन्दी दिवस …

हरश्रृंगार

हरश्रृंगार पांच साल पुरानी तस्वीर है । इसी शरद ऋतु की एक सुबह अपने गाँव में - घर के बाहरी आँगन में लगे हरसिंगार के पौधे से झरते फूलों को इकट्ठा कर यह तस्वीर मैंने खिंची थी ।शेफाली, पारिजात, सिउली, हरसिंगार, प्राजक्ता …न जाने कितने नाम हैं ।अपनी मीठी ख़ुशबू से सारी रात चाँद को … Continue reading हरश्रृंगार

अभिभावक होना …

इस जीवन में कई मुश्किल काम करने होते हैं - उन्ही में से एक है - 'पैरेंटिंग' ! अब इस उम्र में जब बच्चे टीनएजर हो चुके हैं - इसका दबाब महसूस होता है ! हर एक पीढी अपने हिसाब से - अपने दौर की नज़र से - अपनी बेसिक क्लास की समझ से 'पैरेंटिंग' … Continue reading अभिभावक होना …

जब तुम ताज को देखकर …

तब जब तुम ताज को देख कर झूम जाओगी …उम्र के उस मोड़ पर .अपनी सफेद बालों और बेहतरीन पाशमिना के साथ ….उम्र के उस मोड़ पर .एयरपोर्ट से उसी तेज चाल से निकलते हुए ….मुझे देख मुस्कुरा बैठोगी ….टैक्सी लाए हो या खुद ड्राइव करोगे …थोड़ी तंग …थोड़ी परेशान …मुझसे हमेशा कि तरह बेझिजक … Continue reading जब तुम ताज को देखकर …

ज़िन्दगी के पन्ने

हर ज़िंदगी एक कहानी है ! पर कोई कहानी पूर्ण नहीं है ! हर कहानी के कुछ पन्ने गायब हैं ! हर एक इंसान को हक़ है, वो अपने ज़िंदगी के उन पन्नों को फिर से नहीं पढ़े या पढाए, उनको हमेशा के लिए गायब कर देना ही - कहानी को सुन्दर बनाता है ! … Continue reading ज़िन्दगी के पन्ने

प्रेम और युद्ध

दिनकर लिखते हैं - " समस्या युद्ध की हो अथवा प्रेम की, कठिनाइयाँ सर्वत्र समान हैं। " - दोनों में बहुत साहस चाहिए होता है ! हवा में तलवार भांजना 'युद्ध' नहीं होता और ना ही कविता लिख सन्देश भेजना प्रेम होता है ! युद्ध और प्रेम दोनों की भावनात्मक इंटेंसिटी एक ही है ! … Continue reading प्रेम और युद्ध

प्रकृति , धरा और ऋतुराज

धरा - सखी , ये किसकी आहट है ?प्रकृति - ये वसंत की आहट लगती है ..धरा - कौन वसंत ? हेमंत का भाई ऋतुराज वसंत ?प्रकृती - हाँ , वही तुम्हारा ऋतुराज वसंत …:))धरा - और ये शिशिर ?प्रकृति - वो अब जाने वाला है …धरा - सुनो , मैं कैसी दिख रही हूँ … Continue reading प्रकृति , धरा और ऋतुराज