घड़ी ….

अविनाश / ब्लैक डायल बहुत दिनों तक हाथ में घड़ी पहन सोने की आदत बनी रही - इस बीच कई बार घड़ी स्लो हो जाती और देर से नींद खुलती - बहुत अफ़सोस और कुछ खोया खोया सा महसूस होता था - अब इस ग्लानी से ऊपर उठ चूका हूँ - लगता है - पाया … Continue reading घड़ी ….

कहानी साइकिल की …

कहानी साइकिल की : ब्रांड रेलेे 😊कोई राजा हो या रंक - हमारे समाज में उसकी पहली सवारी साइकिल ही होती है और साइकिल के प्रति उसका प्रेम आजीवन रहता है - भले ही वो चढ़े या नहीं चढ़े ।अगर आप अपने बचपन को याद करें तो बड़े बुजुर्ग ब्रांड रेलेे की बात करते थे … Continue reading कहानी साइकिल की …

कहानी साबुन की …

खस साबुन इस छोटे से जीवन में तरह तरह का साबुन देखा और लगाया लेकिन आज भी गर्मी के दिनों में खस और जाड़ा में पियर्स का कोई जोड़ नहीं है ।बाबा को लक्स लगाते देखते थे । दे लक्स …दे लक्स । ढेला जैसा लेकिन सुगंधित । किसी पर चला दीजिए तो कपार फुट … Continue reading कहानी साबुन की …

कुछ यूं ही …

मेरे गाँव के पास से एक छोटी रेलवे लाईन गुजरती है - हर दो चार घंटे में एक गाड़ी इधर या उधर से - पहले भाप इंजन - छुक छुक …लेकिन अब डीजल इंजन है ..भोम्पू देता है ..बचपन में छुक छुक गाड़ी को देखने के बहाने रेलवे ट्रैक के पास जाते थे ..वहाँ ..पटरी … Continue reading कुछ यूं ही …

यादें – 07

Yadein ~ 07 बात 14 अगस्त 2006 की है । 2005 में डबल प्रोमोशन के साथ सहायक प्राध्यापक बन चुके थे , घर बुक हो गया था और चमचमाती नई कार दरवाजे खड़ी थी । पैसों को लेकर थोड़ी तंगी थी । सो छुट्टियों के दिन किसी अन्य विश्वविद्यालय में एक्स्ट्रा क्लास लेने लगा था … Continue reading यादें – 07