एक कविता …

अहंकार तुम्हारा शस्त्र हैउसके बगैर जीना व्यर्थ है … शस्त्र के साथ हर जगह नहीं …इसके बगैर भी हर जगह नहीं ….अहंकार अग्रज के साथ नहीं ….कुचल दिए जाओगे …अहंकार अनुज के साथ नहीं …घृणा के पात्र बन जाओगे ….अहंकार प्रेम में नहीं …दफ़न हो जाओगे ….अहंकार गुरु के साथ नहीं …कफ़न में लिपट जाओगे … Continue reading एक कविता …

हरश्रृंगार

हरश्रृंगार पांच साल पुरानी तस्वीर है । इसी शरद ऋतु की एक सुबह अपने गाँव में - घर के बाहरी आँगन में लगे हरसिंगार के पौधे से झरते फूलों को इकट्ठा कर यह तस्वीर मैंने खिंची थी ।शेफाली, पारिजात, सिउली, हरसिंगार, प्राजक्ता …न जाने कितने नाम हैं ।अपनी मीठी ख़ुशबू से सारी रात चाँद को … Continue reading हरश्रृंगार