प्रेम का आधार …

शायद मैंने पहले भी लिखा था और फिर से लिख रहा हूँ ! प्रेम का आधार क्या है ? मै 'आकर्षण' की बात नहीं कर रहा ! मै विशुद्ध प्रेम की बात कर रहा हूँ ! मेरी नज़र में प्रेम का दो आधार है - 'खून और अपनापन' ! बाकी सभी आधार पल भर के … Continue reading प्रेम का आधार …

कुछ यूं ही …

मेरे गाँव के पास से एक छोटी रेलवे लाईन गुजरती है - हर दो चार घंटे में एक गाड़ी इधर या उधर से - पहले भाप इंजन - छुक छुक …लेकिन अब डीजल इंजन है ..भोम्पू देता है ..बचपन में छुक छुक गाड़ी को देखने के बहाने रेलवे ट्रैक के पास जाते थे ..वहाँ ..पटरी … Continue reading कुछ यूं ही …

स्व तारकेश्वरी सिन्हा का लिखा एक लेख

स्व तारकेश्वरी सिन्हा जी देश की आज़ादी के वक़्त 'लंदन स्कूल ओफ इकोनोमिक्स', लंदन में थी । महज़ 26 साल में सांसद बनी और बाद में नेहरु मंत्रिमंडल में उप वित्त मंत्री भी । पटना पूर्वी / बाढ़ से चार बार सांसद भी रही ।उनका यह लेख मैंने वर्षों पहले पढ़ा था । बेहतरीन वक़्ता … Continue reading स्व तारकेश्वरी सिन्हा का लिखा एक लेख

छाया / साया / शैडो

Shadow 'तू जहाँ जहाँ चलेगा …मेरा साया साथ होगा' - राजा मेंहदी हसन अली खान की बेहतरीन पोएट्री ।आख़िर ये साया / छाया / शैडो है क्या चीज़ । विज्ञान ने जो कुछ इसके बारे में समझाया - वह तो आँखों के सामने है , हर रोज दिखता है । लेकिन विज्ञान से आगे भी … Continue reading छाया / साया / शैडो

जब तुम ताज को देखकर …

तब जब तुम ताज को देख कर झूम जाओगी …उम्र के उस मोड़ पर .अपनी सफेद बालों और बेहतरीन पाशमिना के साथ ….उम्र के उस मोड़ पर .एयरपोर्ट से उसी तेज चाल से निकलते हुए ….मुझे देख मुस्कुरा बैठोगी ….टैक्सी लाए हो या खुद ड्राइव करोगे …थोड़ी तंग …थोड़ी परेशान …मुझसे हमेशा कि तरह बेझिजक … Continue reading जब तुम ताज को देखकर …

ज़िन्दगी के पन्ने

हर ज़िंदगी एक कहानी है ! पर कोई कहानी पूर्ण नहीं है ! हर कहानी के कुछ पन्ने गायब हैं ! हर एक इंसान को हक़ है, वो अपने ज़िंदगी के उन पन्नों को फिर से नहीं पढ़े या पढाए, उनको हमेशा के लिए गायब कर देना ही - कहानी को सुन्दर बनाता है ! … Continue reading ज़िन्दगी के पन्ने

प्रेम और युद्ध

दिनकर लिखते हैं - " समस्या युद्ध की हो अथवा प्रेम की, कठिनाइयाँ सर्वत्र समान हैं। " - दोनों में बहुत साहस चाहिए होता है ! हवा में तलवार भांजना 'युद्ध' नहीं होता और ना ही कविता लिख सन्देश भेजना प्रेम होता है ! युद्ध और प्रेम दोनों की भावनात्मक इंटेंसिटी एक ही है ! … Continue reading प्रेम और युद्ध