इंस्टैंट मुहब्बत …

InstantMuhabbat

नॉएडा के , सेक्टर अठारह के , एचएसबीसी बैंक ब्रांच में उस रोज – झुकी पलकों को आहिस्ता से उठा , अपने गेशुओं को एक तरफ़ शाने पर रख , वो एक हमउम्र जब पाँच क़दम चल कर, मुझ अनजान तक पहुँच , कहती है – ‘एक्सक्यूज मी , पेन प्लीज़’ । सेकेंड के सौवें हिस्से में – मेरे मन में झंकार बिट्स बजने लगते है 😐 मैं मासूम छोरा – पेन की ढक्कन खोल ख़ुद को पृथ्वीराज चौहान समझ उनको अपना पेन समर्पित करता हूँ – इस घमंड के साथ की , बैंक में अन्य बीस मर्द भी थे पर उस मासूम ने मुझसे ही पेन माँगा है । जब तक वो अपने चेकबुक पर कुछ लिखती हैं – मेरे मन मंदिर में एक ही गाना बजता है – ‘यह पेन नहीं मेरा दिल है’ ।
इंसान ख़्वाबों में जीता है । मेरे मासूम मन में ख़्वाब जाग जाते है – जब वो क़लम वापस करेंगी , मैं उन्हें कॉफ़ी के लिए पूछूँगा , कॉफ़ी पर ही बातों का सिलसिला चल पड़ेगा , इस कॉफ़ी के ख़त्म होने के साथ , अगली मुलाक़ात का समय तय होगा । ख़्वाबों के सिलसिले भला कब रुकते हैं 😐
पर ऐसा हो न सका – टेलर से पैसे निकाल , लूई वेटन के लाल टोट बैग में पैसा रखते ही वो झुकी पलकें थोड़ी कठोर हो गयीं । बड़े ही कठोर निगाहों से उन्होंने मेरा पेन वापस किया – मेरे दिल ने कहा – काश आप ये क़लम रख लेती । पर अब तो पेन का काम ख़त्म हो चुका था , भला क्यों वो उसी अदा में रहतीं 😐
ताश के पत्ते की तरह सारे ख़्वाब बिखरते चले गए । अंतिम आस थी – काश वो थैंक यू कहती । पर मुझ जैसे नसीब के छोटे आदमी को थैंक्स भी नसीब नहीं हुआ । पेन लौटाते वक़्त वो निगाहें भी नहीं मिल सकीं । हाँ , वो वही क़ातिल निगाहें थी जिन्होंने बड़े मासूमियत से पेन माँगा था । एक झटके में वो बाहर निकल गयीं ….और मैं देखता रह गया …अपने टूटे दिल के बिखरते ख़्वाबों को समेटते हुये …
फिर सोचा …कुछ देर और रुक जाऊँ …फिर कोई और पेन माँगनेवाली आ जाए …😐
~ रंजन ऋतुराज / #Daalaan / 11.01.17
यह महज़ एक कल्पना है , हास्य है , एक व्यंग्य है – उन सोख हमउम्र हसीनाओं पर जो हज़ारों के लूई वेटन बैग में एक क़लम तक नहीं रखती हैं और काम ख़त्म हो जाने के बाद , क़लम वापस करते वक़्त – थैंक्स तक नहीं बोलतीं है । और हम पुरुष न जाने कितने ख़्वाब बुन लेते हैं – क़लम देने और वापस लेने के बीच 😕
लेकिन यह शुद्ध कल्पना भी नहीं है , यह दुर्घटना सितंबर , 2016 में नोएडा में हुई और चेक पर साईन करते वक़्त , मैंने उनका नाम भी पढ़ा और फेसबुक खोल उनका प्रोफाईल भी चेक किया , फ्रेंड रिक्वेस्ट का कोई ऑपशन नहीं दिखा – मर्द जात …कुकुर 😐 बड़का भारी कुकुर …हा हा हा ।

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